राजस्थान की रुदाली बस्ती की मुखिया बावरी को एक रात हीरामन सेठ के घर मोतीलाल की अर्थी पर शोक जताने बुलाया जाता है। लेकिन वहाँ उसे एक अघोर साया महसूस होता है और वो सारी रुदालियों को रोने से मना कर देती है। उसी दिन से बस्ती में रात को अजीब आवाज़ें आने लगती हैं… आखिर मोतीलाल की मौत के साथ कौन-सा श्राप जाग उठा?