रात के 2 बजे सौरभ बदहवास हालत में अपने माँ-बाप के घर का दरवाज़ा खटखटाता है — कोई उसके पीछे पड़ा है। शहर में नई नौकरी, दोस्त विश्वजीत के साथ नया घर, और रोज़ बस स्टॉप पर बैठा एक अजीब भिखारी, जो पैसे देने वालों को कभी "सूअर" तो कभी "चिकन" कहकर पुकारता है। उधर ऑफ़िस के पास जंगल में नोची हुई लाशें मिलने लगती हैं... आख़िर उस भिखारी के अजीब नामों का मतलब क्या है?